बांग्लादेश में हिंदू व्यापारी को जिंदा जलाने की कोशिश, 15 दिनों में हिंदुओं पर हमले की चौथी घटना ।
बांग्लादेश में हिंदू व्यापारी को जिंदा जलाने की कोशिश, 15 दिनों में हिंदुओं पर हमले की चौथी घटना ।
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डेस्क : बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर लक्षित हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नए साल की पूर्व संध्या पर शरियतपुर जिले में एक हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास पर भीड़ ने जानलेवा हमला किया। हमलावरों ने उन्हें चाकू से घायल किया, पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की, लेकिन वे पास के तालाब में कूदकर किसी तरह बच निकले।
गंभीर रूप से घायल खोकन को पहले शरियतपुर सदर अस्पताल और फिर बेहतर इलाज के लिए ढाका रेफर किया गया है।खोकन चंद्र दास (50) केउरभंगा बाजार में दवा की दुकान और मोबाइल बैंकिंग का कारोबार चलाते हैं। 31 दिसंबर की रात करीब 9:30 बजे दुकान बंद करके ऑटोरिक्शा से घर लौट रहे थे, तभी दामुद्या-शरियतपुर रोड पर हमलावरों ने वाहन रोका और उन पर हमला बोल दिया।
पीड़ित की पत्नी सीमा दास ने बताया कि उनके पति ने हमलावरों में से दो को पहचान लिया था, इसलिए उन्हें मारने की कोशिश की गई। पुलिस ने दो संदिग्धों की पहचान की है और गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।
यह घटना पिछले 15 दिनों में हिंदू समुदाय पर हुए लक्षित हमलों की चौथी घटना है:
18 दिसंबर 2025: मायमेनसिंह जिले के भालुका में गारमेंट फैक्ट्री कर्मचारी दीपू चंद्र दास (27) पर कथित ईशनिंदा का आरोप लगाकर भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला, शव को पेड़ से लटकाया और जलाया। पुलिस ने 12 लोगों को गिरफ्तार किया है।
24 दिसंबर 2025: राजबारी क्षेत्र में अमृत मोंडल (29) को भीड़ ने लिंच कर दिया। अंतरिम सरकार ने इसे आपराधिक घटना बताया, लेकिन अल्पसंख्यक संगठनों ने सांप्रदायिक करार दिया।
29 दिसंबर 2025: एक हिंदू सुरक्षा गार्ड को गोली मारी गई (कुछ रिपोर्ट्स में बजेंद्र बिस्वास का जिक्र)।
31 दिसंबर 2025: खोकन चंद्र दास पर हमला।
जाहिर है की छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत (18 दिसंबर) के बाद भड़की अशांति की पृष्ठभूमि में हुई हैं। हादी की मौत के बाद देशभर में हिंसा फैली, जिसमें मीडिया कार्यालयों, सांस्कृतिक केंद्रों और अल्पसंख्यक संपत्तियों को निशाना बनाया गया। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, जून से दिसंबर 2025 तक ईशनिंदा के झूठे आरोपों से जुड़े 70 से अधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें ज्यादातर पीड़ित हिंदू हैं।
भारत ने भी इन हमलों पर गहरी चिंता जताई है और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

















